किधर जाओगे ?

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  • Saturday, 23 August 2008
  • by
  • श्रीकांत पाराशर
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  • इंसान को इंसान समझो तो कुछ कर जाओगे
    नहीं तो जब मौत आएगी दरवाजे पर,
    डर जाओगे

    दूसरों की राहों में, ऐ कांटे बिछाने वालो
    कभी उन्हीं पर चलना पड़ा,
    तो किधर जाओगे?

    चापलूसों के चढ़ाए, ना चढ़ो चने के पेड़ पर
    मुगालते में ही बने रहोगे कि,
    खुद उतर जाओगे

    उनकी देखकर खुशियां, जलकर होते रहे गर दुखी
    तो यह मत भूलना कि,
    यों ही बेमोत मर जाओगे

    भगवान ने दी हैं खुशियां, तो लग जाओ बांटने में
    देखना तुम खुद भी, खुशियों से भर जाओगे।

    8 comments:

    Mrs. Asha Joglekar said...

    bahut badhiya par sheron men matraen barabar nahin hain agar aap is par dhyan den to bade abdhiya shayar hain aap .
    masalan pehla sher
    insan ko insan samzoge to tar jaoge
    nahee to maut jab aayegi to dar jaoge
    aisa ho to padh ne men jyada maza aata hai

    aur doosara
    doosaron ki rah men a katen bichane walon
    wo agar rah men bich jaen ,kahan jaoge.
    sorry aapko bura laga ho to par mai aapmen bahut sambhwanaen dekhtee hoon.

    संगीता पुरी said...

    भगवान ने दी हैं खुशियां, तो लग जाओ बांटने में
    देखना तुम खुद भी, खुशियों से भर जाओगे।
    क्या बात है।
    जन्माष्टमी की बहुत बहुत बधाई।

    Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

    बहुत सुंदर कविता है और बड़े पते की बात कही है आपने.
    कन्हैया लाल की जय! जन्माष्टमी की बधाई!

    Anil Pusadkar said...

    pura insaniyat ka path hai,kash aapki bhawnaon par sare log amal kar le to desh swarg ho jaye.bahut hi badhiya likha aapne aapke lekhan ko aapki bhawnaon ko naman

    Prashant Verma said...

    आपकी कविता बहुत ही सुंदर है श्रीमान. मैं भी कोशिश करता हूँ कि कविता लिखूं पर उस हिसाब से मैं कविता के शब्द ढूंढ़ ही नहीं पाता जैसा कि आपने लिखा है. आज का दौर इतना ख़राब हो गया है कि लोग केवल अपने से ही परेशान है. अपना तथा अपने परिवार कि देख-रेख करते ही समय निकल जाता है. ऐसे में दूसरों का ख्याल करने का मौका नहीं मिल पाता है. यहाँ एक बात और भी है कि दूसरों के लिए समय निकालने से ही तो समय निकालता है. आज हर व्यक्ति को अपना आत्मविश्लेषण करने कि जरुरत है. कहा जा रहा है कि पूरा विश्व एक गाँव बन गया है, लेकिन ये बात भी उतनी ही सही है कि इस गाँव से गाँव की विशेषता ही ख़त्म होती जा रही है. गाँव कि विशेषता है सहयोग, सहभागिता, सदभाव, प्रेम, भाईचारा...

    swati said...

    bahut sundar

    Udan Tashtari said...

    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति है !बधाई !!

    singhsdm said...

    Soth india me hindi ka alakh jagaaye rakhiye.Aaj poore desh ko ek sutra me bandhe ki zaroorat hai. Aap sachmuch badhai ke patra hain. Kabhi hamare blog par padharen, shayad accha lage.