राजनीति पर संपादकीय और अन्य लेख लिखते-लिखते जब मन करता है कि कभी-कभी कुछ इससे अलग कोशिश भी करनी चाहिए तब ऐसी कोई रचना लिखी जाती है।
उनकी मोहब्बत का
ऐसा वैसा ना सिला देना
जरा प्यार से मना करना
गुस्से में ना ठुकरा देना।
होली के दिन किसी फसाद में
जिन्होंने खोया कोई परिजन
उनके बदरंग चेहरों पर कोई
प्यार का रंग लगा देना।
लड़ने वाले तो यहां
बहुत मिल जाएंगे मेरे दोस्त
दो दुश्मनों के बीच की दूरियां
मिटा सको तो मिटा देना।
समाजसेवी होने का दंभ
तो भरते हैं बहुत लोग
मगर उन्हें भी कठिन लगता है
किसी भूखे को रोटी खिला देना।
अपने बच्चे के लिए रोज
खरीदते हो ढेरों खिलौने
एक खिलौना किसी
गरीब के बच्चे को दिला देना।
प्यार का रंग लगा देना
Posted on Sunday, 31 August 2008 by श्रीकांत पाराशर in
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5 comments:
garib to khud khilauna hota hai taqdeeR ka,bahut achha likha apne ,apki bhawnawon ka naman karta hun
Bahut accha likha hai.
होली के दिन किसी फसाद में
जिन्होंने खोया कोई परिजन
उनके बदरंग चेहरों पर कोई
प्यार का रंग लगा देना।
सुन्दर अभिव्यक्ति के लिए बधाई।
होली के दिन किसी फसाद में
जिन्होंने खोया कोई परिजन
उनके बदरंग चेहरों पर कोई
प्यार का रंग लगा देना।
Shrikant Ji vakai dil ko chhu lene vali line hai. Kavita to aapke mukharvind se suna hi tha..., padne par aur achchha laga.
Badhai
समाजसेवी होने का दंभ
तो भरते हैं बहुत लोग
मगर उन्हें भी कठिन लगता है
किसी भूखे को रोटी खिला देना।
very nice
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